डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस की सबसे बड़ी बुराई यह है कि इसमें जॉइनिंग फ्री है
डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस की सबसे बड़ी बुराई यह है कि इसमें जॉइनिंग फ्री है”**
डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस को लेकर अक्सर यह कहा जाता है कि इसकी सबसे बड़ी बुराई यही है कि इसमें जॉइनिंग बिल्कुल फ्री होती है। सुनने में यह बात विरोधाभासी लगती है, क्योंकि आमतौर पर फ्री शब्द को हम फायदे से जोड़कर देखते हैं। लेकिन जब इस विषय को गहराई से समझा जाए, तो पता चलता है कि यही फ्री जॉइनिंग इस बिज़नेस की सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है।
जब किसी काम को शुरू करने के लिए कोई फीस या निवेश नहीं देना पड़ता, तो लोग उसे गंभीरता से नहीं लेते। डायरेक्ट सेलिंग में भी यही होता है। बहुत से लोग केवल दोस्ती, रिश्तेदारी या जिज्ञासा के कारण जॉइन कर लेते हैं, लेकिन उनके अंदर सीखने की इच्छा, मेहनत करने का जुनून और लंबे समय तक टिके रहने का संकल्प नहीं होता। परिणामस्वरूप वे कुछ ही दिनों में यह कहने लगते हैं कि “यह बिज़नेस हमारे बस का नहीं है।”
फ्री जॉइनिंग की वजह से लोग इस बिज़नेस की वैल्यू को नहीं समझ पाते। जिस चीज़ के लिए हमने कुछ भी चुकाया नहीं, उसकी कदर अक्सर कम हो जाती है। ऐसे लोग ट्रेनिंग, मीटिंग और सेमिनार को हल्के में लेते हैं। वे समय पर नहीं आते, सिस्टम को फॉलो नहीं करते और फिर असफलता का दोष कंपनी या बिज़नेस मॉडल पर डाल देते हैं।
इसके अलावा, फ्री जॉइनिंग के कारण टीम में कई ऐसे लोग आ जाते हैं जो बिना किसी लक्ष्य और विज़न के जुड़े होते हैं। वे न तो खुद काम करते हैं और न ही दूसरों को करने देते हैं। नकारात्मक बातें फैलाना, अफवाहें बनाना और दूसरों का मनोबल गिराना इनके लिए आसान हो जाता है। इससे पूरी टीम की ग्रोथ प्रभावित होती है।
अगर डायरेक्ट सेलिंग में जॉइनिंग के साथ थोड़ी-सी भी प्रतिबद्धता जुड़ी होती, तो लोग इसे ज्यादा गंभीरता से लेते। वे सीखने, समझने और लगातार मेहनत करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होते। लेकिन फ्री जॉइनिंग के कारण यह बिज़नेस कई लोगों के लिए केवल “ट्रायल” बनकर रह जाता है।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि डायरेक्ट सेलिंग बिज़नेस में समस्या फ्री जॉइनिंग नहीं है, बल्कि लोगों की मानसिकता है। जो लोग इसे अवसर मानकर पूरी ईमानदारी से सीखते और काम करते हैं, वे फ्री जॉइनिंग के बावजूद भी इस बिज़नेस में बड़ी सफलता हासिल करते हैं।


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